Yuvaa voice:
मोंठ। खाद की किल्लत से परेशान किसानों ने सोमवार को नगर के मुख्य मार्ग को जैम कर दिया। काफी दूर तक जैम लगता देख पुलिस ने किसानों से बातचीत कर करीब आधा घंटा बाद यातायात सुचारु किया। किसानों की मांग थी कि बुवाई का समय चल रहा है लेकिन समिति में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बुवाई करनी में देर हो रही है। किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर सोसाइटी में डीएपी खाद की मांग की है। किसानों की चेतावनी है कि अगर उन्हें खाद नहीं मिला तो वह भूख हड़ताल करने के लिए विवश होंगे। इस प्रदर्शन की अगवानी खुद समिति अध्यक्ष राजाराम अहिरवार कर रहे थे। एसडीम ने जल्द खाद उपलब्ध कराए जाने की बात कही है।
तहसील क्षेत्र में फसल की बुवाई शुरू हो चुकी है। किसानों को बुबाई के लिए डीएपी खाद की अत्यंत आवश्यकता है, लेकिन खाद की भारी किल्लत है। ऐसे में किसानों को फसल की बुवाई करने में देर हो रही है। इसी समस्या से परेशान दर्जनों किसानों ने समिति अध्यक्ष राजाराम अहिरवार की अगुवानी में मोंठ नगर का मुख्य मार्ग जैम कर दिया, दोनों ओर करीब आधा घंटा तक वाहन खड़े रहे। जैन की समस्या देखते ही पुलिस ने पहुंचकर किसानों से बात की और कुछ देर बाद जैम खुलवाया गया।
परेशान किसानों ने अपनी बात एसडीएम तक रखने के लिए उन्हें एक ज्ञापन दिया। उन्होंने ज्ञापन में लिखा कि फसल की बुवाई का समय आ गया है लेकिन डीएपी खाद उपलब्ध न होने की वजह से बुवाई करने में उन्हें देर हो रही है। वह खाद लेने के लिये कई दिनों से समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक दो बोरी डीएपी खाद भी नहीं मिल रहा। सोसाइटी में कई दिनों से खाद उपलब्ध ही नहीं है। दूसरी ओर कई किसानों के प्रपत्र खाद लेने के लिए करीब एक सप्ताह से सोसाइटी में जमा है, लेकिन वह खाली हाथ ही लौटे हैं। किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द डीएपी खाद मंगा कर किसानों की समस्या दूर की जाये। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि अगर खाद नहीं मिला तो वह मजबूरन भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे।
उक्त मामले में एसडीएम प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि "किसानों की इस समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है, जल्द ही उनके लिये डीएपी खाद उपलब्ध करा दिया जायेगा।"
इस दौरान समिति अध्यक्ष राजाराम अहिरवार, विद्या देवी, ज्ञान सिंह, संतोष, तेज सिंह, सुनील, हरिराम, भागवत, कमलेश पाल, शीला, राम प्रकाश, सेवाराम सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे।
By: Manoj Kumar niralaa
