Yuvaa voice:
मोंठ। गल्ला मंडी में व्यापारियों की मनमानी और धान खरीद में अनियमितताओं से आहत किसानों ने मंगलवार सुबह मोंठ-समथर मार्ग पर जाम लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि व्यापारी धान की खरीद में मनमानी कर रहे हैं। प्राइवेट बिक्री में अधिक दाम देकर धान खरीद रहे हैं, जबकि सरकारी दर पर सस्ते रेट लगाकर किसानों का शोषण किया जा रहा है।
--किसानों का गुस्सा फूटा, जाम लगाकर किया प्रदर्शन
मोंठ की गल्ला मंडी में अपनी धान की फसल बेचने पहुंचे किसानों को कई दिनों तक इंतजार के बाद भी उचित मूल्य नहीं मिला। इससे नाराज होकर किसानों ने मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। गुस्साये किसानों ने मण्डी के सामने धरना देकर व्यापारियों की मनमानी और प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ नारेबाजी की।
--किसानों ने लगाए ये गंभीर आरोप
जालौन निवासी किसान दया स्वरूप यादव ने बताया कि "व्यापारियों का रवैया पूरी तरह से पक्षपाती है। वे कम मात्रा में धान लाने वाले किसानों से ₹3,500-₹3,600 प्रति कुंतल की दर से धान खरीदते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में धान लाने वाले किसानों को केवल ₹2,200-₹2,300 प्रति कुंतल का रेट देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारी प्राइवेट बिक्री में ज्यादा दाम चुकाते हैं, जबकि सरकारी डाक पर सस्ती दर लगाते हैं।"
ग्राम रेव निवासी किसान गोलू ने कहा, "हमारे लिए बीज, खाद और कीटनाशक महंगे हैं, लेकिन जब फसल बेचने की बारी आती है, तो हमें सस्ती दरें मिलती हैं।"
वहीं, ग्राम परगना के किसान जयहिन्द ने आरोप लगाया कि "दो दिन से मंडी में आने के बावजूद उनकी धान खरीदने में व्यापारियों ने आनाकानी की।"
--भुगतान में देरी और कटौती की शिकायत
किसानों का यह भी आरोप है कि सस्ते दर पर धान खरीदने के बाद भी व्यापारियों द्वारा समय पर भुगतान नहीं किया जाता। किसानों को अपनी रकम के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं, और भुगतान होने पर भी उसमें 2 प्रतिशत तक की कटौती कर ली जाती है।
--पुलिस ने समझाया, जाम खुलवाया
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे किसानों को समझा-बुझाकर शांत किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जाम खोला गया और यातायात सुचारु हुआ।
--प्रशासन से की गई कार्यवाही की मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि गल्ला मंडी में धान की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता लाई जाए और व्यापारी किसानों का शोषण बंद करें। साथ ही समय पर भुगतान और उचित दर सुनिश्चित की जाए। यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो किसान आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं।
By: Manoj Kumar niralaa
